Wednesday, 18 February 2015


kar ke apni nazar nichi guzar gaii phir se !
dhadkane kitne dilon ki thahar gaii phir se !!

baad-e-saba ne chaman me ye rangat kaisi bikheri !
ki hasrat unhe dekhne ki machal gaii phir se !!

hai mumkin bahut unki tawajjo mei paa jaau !
mujhse kahti hui yah shaam-o-sahar gaii phir se !!

hai tazuub ye ki aaye na wo mere janaje me !
'tanha' ke gujarne ki dekho khabar gaii phir se !!

- " TANHA " !!
12-02-2015


कर के अपनी नज़र नीची गुज़र गई फिर से !
धड़कनें कितने दिलों की ठहर गई फिर से !!

बाद-ए-सबा ने चमन में ये रंगत कैसी बिखेरी !
कि हसरत उन्हें देखने की मचल गई फिर से !!

है मुमकिन बहुत उनकी तवज्जो मैं पा जाऊँ !
मुझसे कहती हुई यह शामों सहर गई फिर से !!

है ताज्जुब ये कि आएं ना वो मेरे जनाज़े में !
'तन्हा' के गुजरने की देखो ख़बर गई फिर से !!

- " तन्हा " !!
 12-02-2015 

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