Saturday, 30 November 2013

बा-रहम "तन्हा" दे दे इक जाम और.....!!




उठता है धुँआ कैसा मेरे सीने में !
फ़िर लग गई नज़र मेरे पीने में !!

गर ख़ुदा है साथ तो डरना कैसा !
चलो बैठ के पियेंगे हम मदीने में !!

लाता हो पैग़ाम वो शैख़ कहीँ !
तर--तर है ज़िस्म फिर पसीने में !!

इलाही ! डगमगाती है ये कश्ती क्यूँ !
क्या जल्वागर हो गए वो सफ़ीने में !!

लाता है साक़ी भर आब--जम-जम !
उठो ! दौड़ो ! रक्खो ! प्याले क़रीने में !!

बा-रहम "तन्हा" दे दे इक जाम और !
बुझा लूँ आग मुददत की लगी सीने में !!

-          " तन्हा " चारू !!
-           
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


Friday, 29 November 2013

तेरी आँख से छलका वो मोती,,,,,,,,,,,!!







तेरी आँख से छलका वो मोती, दामन में मेरे गर आता  !
क्या कोई क़यामत हो जाती, जो आँचल मेरा भर जाता !!

किस्मत की क्यों मैं बात करूँ, मुमक़िन है ये भी हमदम !
जो साथ तेरा नसीब होता, ये चाँद भी "तन्हा"घर जाता !!

भूलूँ कैसे  माहताब की बातें, तारों की राते, शबनम का साथ !
कोई ग़िला तो ऐसा रख जाता, कोई काम तो ऐसा कर जाता !!

अच्छा है जो तूने हरदम, किया रुसवा मोहब्बत को !
वर्ना देख मेरा चाकगिरेबाँ, इल्ज़ाम ये तेरे सर जाता !!

हाय !मेरे अहबाब तुमने , कैसी नाफ़रमानी कर डाली !
कहते हैं अब रकीबों से वो, अच्छा है "तन्हा"मर जाता !!

-          " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


Thursday, 28 November 2013

ये मोहब्बत न रास आयेगी मुझे,,,.!!!

इस कदर क्या कोई और रुलाएगी मुझे !
सुना मेरी ही कहानियां बहलाएगी मुझे !!

इश्क के झूले पर भी " तन्हा " हम !
अपनी यादों से वो झुलाएगी मुझे  !!

मैं चाहता था मिलना उससे  !
वो जानती थी पा जायेगी मुझे !!

गुजरने भी जाँ से नहीं देता मुझे !
कहना उसका खीच लाएगी मुझे !!

मैं जानता था इश्क की नाकामियाँ !
ये मोहब्बत रास आयेगी मुझे  !!
                     
                                          - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!





मेरी पहली मोहब्बत…..!!!

मेरी पहली मोहब्बत…..!!!



! मेरी पहली मोहब्बत !
है तुझे आख़री सलाम  !!

किया है जो गुनाह
प्यार करके हमने !
भुला सका जो उसे

तो तुझे आखरी सलाम !!

साँसो से भी गहरे
हैं रिश्ते अपने  !
मिटा सका जो इन्हें

तो तुझे आखरी सलाम !!

आँखों में तैरे थे
जो हसीं सपने !
उड़ा सका गर उन्हें

तो तुझे आखरी सलाम !!

किया था इक क़रार
जो कभी हमने !
निभा सका वफ़ा

तो तुझे आखरी सलाम !!

चले थे चन्द क़दम
जो साथ " तन्हा "
लौटा सका गर उन्हें

तो तुझे आखरी सलाम !!

! मेरी पहली मोहब्बत ! है तुझे आख़री सलाम  !!

                                                          - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

कुछ पलों की यादें हैं ! कुछ पल ही वादें हैं !!

कुछ जन्मों की कहानी है
कुछ जन्मों की वीरानी है !
हर सफ़र की बात है ये
"तन्हा" उम्र बितानी है  !!

कुछ सदियों का रोना है
कुछ सदियाँ ही सोना है !
अपना दिल खो ही चुके
और क्या कुछ खोना है !!

कुछ सालों का अफ़साना है
कुछ साल और बहाना है  !
अपने घर भी देखा हमने
ख़ुशियों का आना जाना है !!

कुछ घंटो की  रात है
कुछ घंटो की  बात है !
कट जायेंगे अपने गम
हमकदम जो साथ है !!

कुछ पलों की यादें हैं
कुछ पल ही वादें हैं  !
बीते हैं जो साथ तुम्हारे
अपने वो इरादें हैं  !!
            
                   - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!




मेरे रु- ब -रु न उन्हें बुरा कहिये... !!!


मेरे रु- -रु उन्हें बुरा कहिये !
कहिये बुरा मुझे जो बुरा कहिये !!

अहबाब उनके हुस्न को कमतर कहें !
हैं नज़रें कमज़र्फ़ उन्हें बुरा कहिये !!

लिये फ़िरते हैं रकीबों को जो चार सूँ !
बहलाते हैं दिल तन्हाई में बुरा कहिये !

कहते हैं इश्क में बे-वफ़ाई है यह  !
की जो खता मैंने उसे बुरा कहिये !!

दस्तूर है ये अच्छों को बुरा कहना !
"तन्हा" हम बुरों को भी बुरा कहिये !!

                                         -" तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!




Wednesday, 27 November 2013

दिल बहुत उदास है दास्तान सुनाऊँ किसको.... !!!

                                              चित्रकार - श्री मुकेश चन्द्र पाण्डेय जी का आभार !


दिल बहुत उदास है दास्तान  सुनाऊँ किसको !
हर सफ़र में हूँ "तन्हा" हमसफ़र बनाऊँ किसको !!

था चलना इतना मुश्किल किसी सफ़र में  !
जब चल दिये सफ़र पे ख़ार दिखाऊँ किसको  !!

वो करम और ये सितम मुझ पर  !
क्या कहूँ किससे और बताऊँ किसको !!

रूठे तुम बोले मेरी नादानी पर !
झूठी क़सम दे अब मनाऊँ किसको !!

गिर के उठना और कभी उठ के गिरना !
इन शब्दों का अर्थ अब समझाऊँ किसको !!

तुम भी गर हो सके मेरे अपने  !
तो इस जहान में अपना बनाऊँ किसको !!

गुज़र ही गया "तन्हा" इस जहाँ से तन्हा !
दे ये ख़बर जहाँ में अब रुलाऊँ किसकों  !!

                                      - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!



लबोँ पे उसके वो नाम तो आये... !!!

लबोँ पे उसके वो नाम तो आये !
हम तक कुछ इल्ज़ाम तो आये !!

भीड़ में हो ये " तन्हा " मन  !
ऐसी कोई अब शाम तो आये !!

पी लूँगा उसके रंज ग़म  !
अश्क़ों का वो ज़ाम तो आये !!

मिटा दे हस्ती जहाँ से अपनी !
"तन्हा" को वो इल्हाम तो आये !!
                            
                             - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !! 

हम दिवानो का क्या बयाँ क्या अफसाना है !!

हम दिवानो का क्या बयाँ क्या अफसाना है !
जीने की आरज़ू अब ना मौत का ठिकाना है !!

हम भी जायेंगे जाँ से इक रोज़ जाते -जाते !
अभी तो जीने का कुछ हसीन  बहाना है !!

हमनफ़स , हम सफ़र हम नवाँ कोई !
क्या बताये तुम्हे ये अपना कोन बेग़ाना है !!

कर लो तुम भी दिल्लगी इस दिल के साथ !
"तन्हा" का दिल ज़ालिम कुछ और बहलाना है !!

-          " तन्हा " चारू  !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!





Tuesday, 26 November 2013

राज़-ए-दिल करे ये नुमायाँ कोई !!

राज़--दिल करे ये नुमायाँ कोई !
तेरे शहर में रहे पराया कोई !!

सितम आज़माने की कोशिश में !
मुझे "तन्हा" करे बुलाया कोई !!

रब से करता हूँ मैं दुआ इतनी  !
अब उसको करे सताया कोई !!

सादगी पे मर मिटे हम उसकी !
राज़ उससे जाये छुपाया कोई !!

बुलाने पे कतराता हूँ ये सोच कर  !
अब मिल जाये हमसाया कोई !!

डरता हूँ गुजरते कूँ - -यार से !
कहीं तेग़ जाये आज़माया कोई !!

नज़र रखता हूँ उस दरबार पे  !
जहाँ सर जाये उठाया कोई !!

ख़ुदा ख़ैर ! हूँ रु - -रु ख़ुदा याँ !
अब चिल्मन जाये गिराया कोई !!

बिखेरता हूँ किर्चे मैं दिल की अपने !
तेरी बज़्म से जाये ख़ुदाया कोई !!

लौट आया जहान- -यार से मग़र  !
बज़्म -- दीद में करे जाया कोई !!

अश्क़ों से भिगो देता हूँ ज़मीं ये सोच !
ख़ाक -- आरज़ू जाये उड़ाया कोई !!

क्या जाऊँ " तन्हा " तेरी मज़ार पे !
रूठा मुझसे जाये मनाया कोई  !!

-          " तन्हा " चारू !! 
-           
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!








Monday, 25 November 2013

ग़मों से भी कुछ अपना ....... !


ग़मों से भी  कुछ अपना साथ पुराना निकला !
निकला इक तेरा नाम लाख फ़साना निकला !!

थी मासूम मेरी ज़िद उस चाँद को पाने की  !
बहलाने को मुझे ही सारा ज़माना निकला  !!

मिलती हैं खुशियाँ यूँ तार - तार दामन को !
जैसे डूब सागर में टूटा पैमाना निकला  !!

ज़मीं कूँ - -यार भी होते हैं रौशन  !
जब उसके नाम को छेड़ तराना निकला !!

निकलना ख़ुल्द से आदम का सुना था  !
कान्धों पे सवार "तन्हा" दीवाना निकला !!

                                         - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!



Sunday, 24 November 2013

देखो यारो ! अंजुमन में कौन बारहां रोता है !





देखो यारो ! अंजुमन में कौन बारहां रोता है !
सुनके जिसको जिस्म पसीने दिल पत्थर का होता है !!

तसल्लियों से रखूँ  नाता इतना मुझको होश कहाँ !
देख के तेरा ख़ाली दामन चारोँ पहर दिल रोता है !!

किस रंजिश से पूंछूं जा कर सबब उसके जख्मों का !
रंजिश की शह को पाकर कुछ दर्द जवाँ तो होता है  !!

गमनीन मोहब्बत में होना धीरे से हॅसना फिर रोना !
ऐसे हादसे देख - देख के अपना हौसला खोता है  !!

तेरे लबों को छू कर देखूँ मैं अपनी इन आँखों से  !
देखो " तन्हा "ख्वाब सुहाने अश्कों में डुबोता है !!

                                             - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

Saturday, 23 November 2013

जिसने बिकता बाज़ार में इन्सान देखा !!


कौन है  जिसने " तन्हा " को हैरान देखा !
जिसने बिकता बाज़ार में  इन्सान  देखा  !!

शर्म ;अदब ;गैरत ;मिले बा - ख़ुलूस कहीं !
हो कर मैंने कुछ उनको पशेमान  देखा  !!

गाँधी ;बुद्ध ही नहीं ईसा ; ख़ुदा  राम भी !
घर -घर सज़ा हुआ मैंने ये सामान देखा !!

बिकता फ़रेब  झूठ याँ साज़िल्दे हुनर  !
दर  दीवार पे चस्पा ये दास्तांन देखा !!

मत पूछ कैसे रु -रु  गद्दारे - वतन !
हो दुजानु अक्सरीयत को बे-ज़ुबान देखा !!

बे-खौफ़ जाते थे जिन पे संग ले अहबाब को !
हो दहशतज़दा इन्सान राह - -वीरान देखा !!

उलट जायेगा इक रोज़ जहाँ का चलन  !
उलटी रोशनाई में दर्ज़ हर्फ़े बयान देखा !!

हो जैसे संगे-तुर्बत पे रौशन शम्मे-मज़ार !
मैंने भी " तन्हा "जैसा नूर--इंसान देखा !!

                                      - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!







कल रात मेरे आँगन में....... !!!




कल रात मेरे आँगन में ; कुछ सूखे फूल मिले !
एक "तन्हा" चाँद मिला ;किस्से नामालूम मिले !!

बर्फ़ सी चादर फैली थी ; दूर सूखे बरगद पर  !
सपना सिर्फ एक मिला ; जाने कितने शूल मिले !!

अंधियारी काली घटायें ; छा रहीं थी अंबर पर !
हादसा तो सिर्फ एक हुआ सपने सारे धूल मिले !!

परत दर परत खोला ; एक कागज़ मैला सा  !
तेरी मेरी ज़ुदाई के फिर सबब माक़ूल मिले  !!

                                         - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

मैं "तन्हा"हो गया …….. !!

मैं "तन्हा"हो गया …….. !!











कह सके ज़ज्बात तो मैं तन्हा हो गया !
दे सके तुम साथ तो मैं "तन्हा"हो गया !!

गिनता रहा यूँ ही मैं क़दमों की आहट  !
आया कोई पास तो मैं "तन्हा" हो गया !!

तेरे लबों पे देर तक इक कंम्पन सा रहा !
कह सके तुम बात तो मैं "तन्हा"हो गया !!

मेरी हथेलियों पर तेरा "वो" नाम लिख देना !
अश्कों से भीगा हाथ तो मैं " तन्हा "हो गया !!

तेरा अपने  हाथो में मेरा वो हाथ ले लेना  !
छोड़ा जो तूने हाथ तो मैं " तन्हा " हो गया !!

                                              - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


संगम का हूँ पानी रखता अब तो पैमाने में !!





कितना वक़्त ज़ाया किया मुझे आज़माने में !
चले आते मुझे पूछते सीधे मयख़ाने  में !!

किसको कहते हैं बुरा चखना तो सबाब है !
वर्ना मयस्सर है कहाँ इतनी ज़माने  में !!

मन्दिर,मज्जिद,क़ाबा,हज़ सब करके छोड़ दिया !
संगम का हूँ पानी रखता अब तो पैमाने में  !!

पत्थऱ को सर नवाया घिसा माथा दहलीज़ पे !
मिले मुझे ख़ुदा राम "तन्हा" बुतखाने में !!

                                          - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!