Saturday, 28 December 2013

आऊँ ख्वाबों में वो ख्वाहिश नहीं हूँ मैं !

ख़ुदा खैर !
मेरा 21 -01 -1998 को लिखा आखरी कलाम फिर " आख़री पयाम " ना बन जाये !!


आऊँ ख्वाबों में वो ख्वाहिश नहीं हूँ मैं !
हूँ इन्सान कोई नुमाइश नहीं हूँ मैं !!

पढ़ लो किसी गज़ल के मानिन्द मुझे !
दोहराऊँ जिसे वो फरमाईश नहीं हूँ मैं !!

फक्र से रहे अपना क्यों न सर ऊँचा !
शर्म- ओ- ग़ैरत का बाइस नहीं हूँ मैं !!

रहो दूर तपिश- ए -ख्यालों से मेरे !
हूँ मुहाज़िर कोई मुहाफ़िज़ नहीं हूँ मैं !!

लबरेज़ हो आँख क्यों न करे मातम !
कोई रहज़न ओ रवाफिज़ नहीं हूँ मैं !!

बख्शी है हयात मुझे रूह -ए -रवाँ ने !
आदम-ए-सानी की पैदाइश नहीं हूँ मैं !!
 
हूँ दिल मादरे-वतन बा-तजल्ली ओ नूर !
फ़रेब-ओ-रिया की आजमाईश नहीं हूँ मैं !!

हूँ जहान-ए-फानी में इक ज़िश्त " तन्हा "!
मोहत्सिब्-ओ-शैख़-ओ-वाइज नहीं हूँ मैं !!

                                    - " तन्हा " चारू !!
                                          21-01-1998
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


ख्व़ाहिश =  लालसा, इच्छा, अनुनय, विनय, मांग
फ़र्माइश= वस्तुआें की मांग, प्रयोजन, आनन्द, इच्छा 
बाइस  = कारण ,सबब
तपिश  = गर्मी ,जलन ,बेक़रारी ,व्याकुलता
मुहाज़िर = शरणार्थी
मुहाफ़िज़ = अभिभावक ,रक्षक ,सरपरस्त
लबरेज़  = भरा हुआ , परिपूर्ण
रहज़न  = लुटेरा
रवाफिज़  = भगोड़ा ,समय पड़ने पर साथ छोड़ने वाला
हयात  = जीवन
रूह-ए -रवाँ  = प्राण वायु , खून में हवा के कण
आदम-ए-सानी  = हज़रत नूह ; मान्यता है की कुफ्र के बाद इंसान की नस्ल इनसे चली थी
पैदाइश = जन्म ,उपज़
मादरे-वतन = मातृभूमि , वतन
बा-तजल्ली  = गरिमा मान ,तेजस्वान
नूर  = आभा वान ,प्रकाश मय
फ़रेब  = छल ,कपट ,धोखा
रिया  = आडम्बर , दिखावा
आज़माईश   =  प्रयत्न, प्रयोग, जाँच, सिद्ध करना
जहान-ए-फानी = नश्वर संसार ,मृत्युलोक
ज़िश्त    = बुरा , ख़राब
मोहत्सिब्  = शराब पीने से रोकने वाला , हिसाब-किताब रखने वाला
शैख़    = बूढ़ा ,बुजुर्ग ,श्रेष्ठ ,नायक

वाइज   = धर्म उपदेशक

Thursday, 26 December 2013

इन्तज़ार में है दिल बेक़रार किसी का !




इन्तज़ार में है दिल बेक़रार किसी का !
क्यों करते हैं हम इन्तज़ार किसी का !!

या रब ! लिखा है मेरी क़िस्मत में शायद !
करते रहना ता-उम्र इन्तज़ार किसी का !!

मेरे दर से लौट न जाये कहीं वो !
ख़ोल दरवाज़े करते हैं इंतज़ार किसी का !!

ऐ ख़ुदा ! देना गर तो मौत दे देना !
न देना मुझे फ़िर इन्तज़ार किसी का !!

हर बला को दावत-ए -सुख़न देता हूँ !
कैसा है मेरा ये इन्तज़ार किसी का !!

था किसी को ' तन्हा ' का इन्तज़ार !
और "तन्हा"था इन्तज़ार किसी का !!

-          " तन्हा " चारू !!
        1994 

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

"तन्हा" दिल पर लगे हुये इल्ज़ाम पुराने याद आये !







"तन्हा" दिल पर लगे हुये इल्ज़ाम पुराने याद आये !
ज़िक्र हुआ अफ़सानो का कई नाम पुराने याद आये !!

ये वीरानगी ये तन्हाइयाँ ये साहिल का मन्जर कैसा !
"तन्हा" मुझे बताने वाले इल्हाम पुराने याद आये !!

न दिखा मुझे यूँ चाक -गिरेबा ओ ज़िग़र अपना !
देख के ये ज़ख्म तेरे एहसान पुराने याद आये !!

झूठी कसमें खाना तेरा वो मुझसे आँख चुराना तेरा !
ना मिलने के तेरे वो पैग़ाम पुराने याद आये !!

राह -गुज़र पे देख तुझे बना हम-सफ़र अपना !
"तन्हा"मिलना याद आया वो बाम पुराने याद आये !!

                                                          -" तन्हा " चारू !!
                                                                Feb. 1995   

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

Tuesday, 24 December 2013

मेरे हाल-ए-दिल से पहले उन तक मेरे गम गये !




मेरे हाल-ए-दिल से पहले उन तक मेरे गम गये !
गये कहने रक़ीब पहले और फ़िर हमदम गये !!

मेरे रश्क-ए-ज़ाना के एहसानों में इक एहसान !
गये तीर-ओ-ख़ंजर पहले और फ़िर मरहम गये !!

मेरे दिल की पशेमानी , उन पेशानी पर वो बल !
गये रख वो लब-बः-लब मगर कुछ बरहम गये !!

मेरी रूसवाईयों का सबब जो पूछा बज़्म के रु-ब-रु !
मेरे कुछ कहने से पहले सबके दिल भी थम गये !!

मेरे दीद ओ दानिस्त में रक़ीब था पासबाँ नेरा !
साथ उसके क़त्ल को ख़ुद बराह-ऐ-करम गये !!

मेरे जुनूं की थी इंतहा एक और दीदार के वास्ते !
गये दफ्न से पहले वो और फिर मेरे दम गये !!

उसके सितम-ओ-जफ़ा के नहीं मानिन्द कोई "तन्हा"!
गो'या रंग-आमेज़ी से पहले निकाले पेंच-ओ-ख़म गये !!

                                            " तन्हा " चारू !!
                                               09-04-1995
 

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

Saturday, 21 December 2013

क्या हुआ आज जो सर पे मेरे ताज़ नहीं है !!



क्या हुआ आज जो सर पे मेरे ताज़ नहीं है !
नहीं मुझ "तन्हा" को इसपे एतराज़ नहीं है !!

लिखता हूँ कलाम लहू-ए-ज़िगर से अपने !
मेरा फ़न तेरी दाद का मोहताज़ नहीं है !!

फितरत-ऐ-शायर की नहीं अब फिक्र मुझे !
है फिक्र शायरे-वतन मेरा हमराज़ नहीं है !!

आये इन्क़लाब कभी है ख्वाहिश मेरी ये  !
मग़र वतन में मुझसा कोई जां-बाज़ नहीं है !!

कैफ़-ऐ-कलाम में हो न क्यूँ बू-ए-इंकलाब !
रूह-ऐ -कलाम अब कोई मुमताज़ नहीं है !!

कल्म करते हो किसलिये ये ज़ुबान मेरी !
ज़ुंबिश तो है हांथों में जो आवाज़ नहीं है !!

दिल में आतिश औ कफ़न कांधों पे अपने !
सरकशी का अंज़ाम अब कोई राज़ नहीं है !!

खेलता हूँ "तन्हा" खूँ औ जाँ बाज़ी अपनी !
बता ऐ हिन्द ! क्या तुझे मुझपे नाज़ नहीं है !!

-          " तन्हा " चारू !!
                                         18-02-1997  
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!




Friday, 20 December 2013

दिल का मतलब गर धड़कन है !



दिल का मतलब गर धड़कन है !
तो साँसों का बन्धन टूट गया !!
माँझी की मंज़िल गर साहिल है !
तो साहिल का मंज़र छूट गया !!

रक्खे सम्हाल के सारे नश्तर !
जो दिल के पार उतर गये !!
तीर-ए-नीमकश जो चला हम पे !
तो हाथों से खंजर छूट गया !!

कूचः दर कूचः जोड़ा "तन्हा" ने !
क़तरा - क़तरा जिन मातो को !!
शिकस्ते - यार जब पाई उसने !
तो अश्कों को समंदर लूट गया !!

--" तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


Wednesday, 18 December 2013

कई शब् से ख्यालों में वो आया नहीं....!!



कई शब् से ख्यालों में वो आया नहीं !
फ़ित्ना-गर ! क्या उसे बुलाया नहीं !!

क्या बात कि आता मुझ तक इल्ज़ाम !
ये और बात कि बज़्म में वो आया नहीं  !!

उभर आये नक्श- -आब-ला -पाँ मेरा !
इस जज़्बात से सफ़ीना पार लगाया नहीं !!

निशाने-मंज़िल होता ये ज़िगर आपना  !
हाय ! वो तीर जो उसने चलाया नहीं  !!

अन्देशा --जां खुरेज़ी --शौक से ही !
उसने अक्सर मुझे आज़माया नहीं !!

क्या मज़ा है सब्र--सुकून में सोच !
तकलीफ़ से दामन ये छुड़ाया नहीं !!

हो जाये जहाँ को कहीं गुमाने -इश्क !
इस फिक्र से"तन्हा"ता-उम्र मुस्कराया नहीं !!

-          " तन्हा " चारू  !!
-            09-02-1997 

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

           

Monday, 16 December 2013

पहरे में तितलियाँ मुझे नाग़वार हैं !!



फ़िज़ा-फ़िज़ा में मस्त सबा का ख़ुमार है !
रंगीनिये -चमन तो यहाँ बेशुमार हैं !!

पाबन्दियाँ नाफ़िज़ अब सय्याद पर करो !
पहरे में तितलियाँ मुझे नाग़वार हैं  !!

रहमतें -ख़ुदा पे भवरा नहीं है आज !
खुदी में अपना वो परवरदिगार है  !!

निशाने -मंज़िल का पता पूछता है क्या !
ज़ुस्तज़ू पुर कैफ़ सबा पर सवार है  !!

कुर्बान हो क्यूँ मेरा दिल वतन !
फ़िक्र--चमन मेरी आदते-शुमार है !!

रखना चिराग अपने आँचल के तले !
रौशन जमाल--यार में गर्दे-ग़ुबार है !!

अंदेशा--हिज्र से घबरा जाये दिल !
राह - -वस्ल में खड़ा शह -सवार है !!

नाचार हूँ ये सोच के कि अब के बरस !
आई ये कैसी शब्--हिज्र --बहार है !!

दुश्वारी--तन्हा का क्या-क्या है सबब !
रंजे-ग़ुल, ख़लिशे-दिल, फ़स्ले-बहार है !!

-          " तन्हा " चारू !!
   12-02-1997
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


Friday, 13 December 2013

शाहीन की परवाज़ पे ..... !!

शाहीन की परवाज़ पे सय्याद के पहरे हैं !
कितनी दूर अभी भी रिहाई के सबेरे हैं  !!

गुलामी औ असीरी "तन्हा" काटी कफ़स में !
अहले-जहाँ के फिर क्यूँ बेनूर से चेहरे हैं !!


तवक्क़ो मिट गई अपनी देख हविश-ए-आदम !
स्याह को मात करते हुये कैसे ये अन्धेरे हैं !!

चन्द गुलों से हैं लिपटे खार बेहिसाब याँ  !
गुलों के दावेदार कहते तेरे हैं न ये मेरे हैं !!

बता "तन्हा"तूने कफ़स में देखे थे ख्वाब जो !
मुक़म्मल का जामः डाले क्या ये ख्वाब तेरे है !!

-          " तन्हा " चारू  !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!





कह न सके नज़र से भी नज़र की ही बात !!




आई है नज़र छू कर किसी शोख़ नज़र को !
छिपायें कहाँ अपनी मद - होश नज़र को !!

कुर्बान है नज़र उनकी नीची नज़र पे !
लगे नज़र उनकी पुर ज़ोश नज़र को !!

आईं हैं नज़र मुझको क़यामत की शोख़ियाँ !
लिल्लाह उन्हें देख सके एक नज़र को !!

कह सके नज़र से भी नज़र की ही बात !
"तन्हा"नज़र ढूँढ रहीं ख़ामोश नज़र  को !!


                                           - " तन्हा " चारू !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

Thursday, 12 December 2013

जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!


हम को तो सताया सभी ने  तुम ना सताओ तो जानें ! 
जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!
                                     जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

थक के बैठा " तन्हा " करता हिसाब किन-किन बातों का !

तुम भी जुल्म ओ जफ़ाओं का हिसाब लगाओ तो जाने  !!
                                        जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

दिल की आग बुझा सकते हैं हम गम ओ मय पीने वाले !

ज़हन की तपती आग को अश्कों से बुझाओ तो जाने !!
                                   जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मिटा सकते हो नाम -ए -ग़म स्याह हर्फ़ दोहराने से भी !

इस दाग-ए-दिल-ए-स्याह को दिल से मिटाओ तो जाने !!
                                   जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

नाक़ाम मोहब्बत का होना कोई बड़ा मुक़ाम नहीं है !

अंजामें-मोहब्बत की कोई दास्तान सुनाओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मुंतज़िर -ए -पैग़ाम अब मेरी आदत में शुमार है  !

जवाबे -वहशत में सनम की लाश भिजवाओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

मंज़िल - मंज़िल दर - दर पे "तन्हा" तन्हा देखा है !

तुम भी शिकस्ता -ए -दिल का दर्द आज़माओ तो जाने !!
                                  जाओ ऐ रूठ के जाने वालो अब याद ना आओ तो जाने !!

                                                      - " तन्हा " चारू !!

                                                          11 - 02 -1997  
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!


Wednesday, 11 December 2013

लब अपना ही कोई शेर गुनगुनायें हैं !!




पूछ इश्क में कितने जख्म खाये हैं !
जब चोट लगी दिल पे तो मुस्करायें हैं !!

वादे नातें कस्में शिक़वे वफ़ा प्यार जफ़ा !
कितने झूठे ये तेरी याद के सायें हैं !!

उसके छालों पे रक्खो कोई तो मरहम !
हो रूसवा तेरे दर से बहुत आयें हैं !!

कोई पूछे उसका हाल मेरे क़ासिद से !
ख़त जिसने बारहां पढ़ के सुनाये हैं !!

जब भी मसले है दिल नामुराद "तन्हा"
लब अपना ही कोई शेर गुनगुनायें हैं !!

-          " तन्हा " चारू !!
                                              19-01-1997
सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!



Tuesday, 10 December 2013

ख्याल -ए -जिस्म के आते ही रूहें जिस्म बदलती हैं !!





हाँथ की लकीर का जादू है..........!!!

  
हाँथ की लकीर का जादू है कि लकीरे हाँथ से बनती हैं !
ना जाने क्यूँ इन लकीरों से लकीरे हाँथ की बदलती हैं !!

बदलना अपनी फ़ितरत ना आदत में हैं शुमार "तन्हा " !
बदल दे इन्सान गर तदबीरें तो तक़दीरे भी बदलती हैं !!

फ़ितरत -ऐ-शायर से परेशां ओ आज़िज़ हो चुका हूँ मैं !
ख्याल-ऐ-फ़ितरत बदलने से तो तंजीमें भी बदलती हैं !!

रूह से ज़िस्म का रिश्ता ज़िस्म के बस की बात नहीं !
ख्याल -ए -जिस्म के आते ही रूहें जिस्म बदलती हैं !!

                                   -" तन्हा " चारू !!
                                     11-12-2013

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

कुछ जन्मों की कहानी है .....!!!




कुछ जन्मों की कहानी है
कुछ जन्मों की वीरानी है !
हर सफ़र की बात है ये
"तन्हा" उम्र बितानी है  !!

कुछ सदियों का रोना है
कुछ सदियाँ ही सोना है !
अपना दिल खो ही चुके
और क्या कुछ खोना है !!

कुछ सालों का अफ़साना है
कुछ साल और बहाना है  !
अपने घर भी देखा हमने
ख़ुशियों का आना जाना है !!

कुछ घंटो की  रात है
कुछ घंटो की  बात है !
कट जायेंगे अपने गम
हमकदम जो साथ है !!

कुछ पलों की यादें हैं
कुछ पल ही वादें हैं  !
बीते हैं जो साथ तुम्हारे
अपने वो इरादें हैं  !!
            
                   - " तन्हा " चारू !!


सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!

Saturday, 7 December 2013

तू " तन्हा " इन्सा जमीं पे मैं " तन्हा "ख़ुदा याँ.......!!

aap ki yaad ek anmol dharohar.... !!
 आप की याद इक अनमोल धरोहर ...... !!! 




देख़ सूरत - - हाल वो ग़मनाक हो गया !
हुआ शर्मसा इतना कि सुपुर्द--ख़ाक हो गया !!

सजाओं ज़िस्म--फानी को गूलों लोबान से !
रूह फ़ना होने से "तन्हा" क्या नापाक़ हो गया !!
   
दोज़ख़ ज़न्नत की पूँछ हक़ीक़त साहिब !
देख जिश्त - -जहान  वो ख़ुदा बे-बाक हो गया !!

मिले जब बढ़ कर गले मोहत्सिब - - रिन्द !
वाक़या रु- - रु- ख़ुदा शर्मनाक हो गया !!
  
पूछा इक सवाल ख़ुदा से हममे तुममे फ़र्क क्या !
बोला इंसान ! देख महज़ इत्तेफ़ाक हो गया !!

तू " तन्हा " इन्सा जमीं पे मैं " तन्हा "ख़ुदा याँ !
तेरे जुल्मों सितम पे याँ गिरेबाँ-चाक हो गया !! 

-          " तन्हा " चारू  !!

सर्वाधिकार सुरक्षित © अम्बुज कुमार खरे  " तन्हा " चारू !!