Monday, 16 January 2017



आप दोस्तों की हौसलाअफ़्ज़ाई का मैं " तन्हा " शुक्रगुज़ार रहूँगा …… !!!!!!

मुझ ग़रीब शायर से क्यों इतना प्यार करना !
मोहब्बत की दौलत को क्यों यूँ बेकार करना !!

रुसवाईयाँ हैं मिलती जागीर -ए-मोहब्बत में !
फिज़ूल होता है ये इश्क़ का कारोबार करना !!

सीखूँ भी यहाँ किस से मुनाफ़े को कमाना 
किसको आता है दिलों का व्यापार करना !!

लुटते हैं जहाँ इश्क में ये दिलों के मुसाफिर !
उस जगह ऐ खुदा तुम मेरा इंतज़ार करना !!

तेरी कसम "तन्हा" सफर ये पार हो गया था !
गुनाह हो गया वो उसका फिर दीदार करना !!

- " तन्हा " !!
13-01-2015


Aap doston ki kauslaafzai ka main " Tanha " shukrguzar rahunga ..... !!!!!


mujh gareeb shayar se kyun itna pyar karna !
mohabbat ki daulat ko kyun yun bekar karna !!

ruswaiyan hai milti jageer -e- mohabbat me !
phijul hota hai ye ishq ka karobaar karna !!

seekhun bhi yahan kis se munafe ko kamana !
kis ko aata hai dilon ka vyapar karna !!

luthte hai jahan ishq me ye dilon ke musafir !
us jagah e khuda tum mera intzaar karna !!

teri kasam " tanha " ye safar paar ho gaya tha !
gunaah ho gaya wo uska phir deedar karna !!

- " tanha " !!
13-01-2015

Friday, 11 September 2015


अपनी आँखों का समन्दर पिया है मैंने !
दाग दामन में नहीं दिल पे लिया है मैंने !!

खामोश मोहब्बत को दम तोड़ने भी दो !
ये जुर्म कुछ ऐसा संगीन किया है मैंने !!

क्या लेगा वो और भी इम्तिहान मेरा !
दिल; जिगर; जाँ  सब ही दिया है मैंने !!

फिक्र-ए-यार से जी का उकताना कैसा !
हर उस लम्हे को दिल में सिया है मैंने !!

मौत भी मुझसे मुत्मईन हो गई तन्हा !
ज़िन्दगी इस सलीक़े से जिया है मैंने !!

- " तन्हा " !!
12-09-2015



apni aakhon ka samandar piya hai maine !
dag damn me nahi dil par liya hai maine !!

khamosh mohabbat ko dam todne bhi do !
ya zurm kuch aisa sangeen kiya hai maine !!

kya lega wo or bhi imtehaan mera !
dil ; jigar ; jaan sab hi diya hai maine !!

fikr-e-yaar se jee ka uktana kaisa !
har us lamhe ko dil me siya hai maine !!

maut bhi mujhse mutmaeen ho gai tanha !
zindgi is saleeke se jiya hai maine !!

- " tanha " !!
12-09-2015


Saturday, 15 August 2015

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!



दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!
        
याद हैं अपने संगी-सहेली वो छुटटी वो गहमा-गहमी !   
ईद बक़रीद हो या होली दिवाली या फिर हो राखी भी !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!

मेरे कानों में अज़ान आरती की भी है आवाज़ गूँजती !
नहीं भूलती आज भी यारों वो गणतन्त्र की झाकीं भी !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!   
      
वो गेंद तड़ी वो छुपा छुपाई सबके संग वो चोर सिपाही      
अपने घर की धमा चौकड़ी और खेल खिलौने साथी भी !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!

बरसात हो या हो गर्मी या फिर सर्दी की उन रातों में !
देर रात में दूर से आती वो बेख़ौफ़ आवाज़ लाठी की !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!

बैठ के " तन्हा " आज यहाँ भी नहीं भूलती हैं मुझको !
सावन की रिम झिम बारिश सी माँ बाप की आँखी भी !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!

भर आया आज दिल अपना नहीं भाती अब कॉफी भी !
फिर कभी सुनाएगा तन्हा अपनी यादें पुरानी बाकी भी !!

दूर देश में बैठ वतन की याद आती है माटी भी !!!

- " तन्हा " !!
24-07-2014

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

yaad hain apne sangi-saheli wo chutti wo gahma-gahmi !
id bakreed ho ya holi diwali ya phir ho raakhi bhi !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

mere kano men azan aarti kibhi hai aawaz gunjti !
nahi bhulti aaj bhi yaron wo gadtantr ki jhaki bhi !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

wo gend tadi wo chupa chupai sabke sang wo chor sipahi !
apne ghar ki dhama chokdi or khel khilone saathi bhi !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

barsat ho ya ho garmi ya phir sardi ki un raaton me !
der raat men door se aati wo bekhouf aawaz lathi ki !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

baith ke " tanha " aaj yahan bhi nahi bhulti hai mujhko !
sawan ki rim jhim baarish si maa baap ki aankhi bhi !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

bhar aaya aaj dil apna nahin bhhaati ab coffee bhi !
phir kabhi sunayega tanha apni yaade purani baaki bhi !!

door desh men baith watan ki yaad aati hai mati bhi !!!

- " tanha " !!
24-07-2014



Saturday, 27 June 2015





हुस्न-ए-पर्दादारी वो समझता नहीं है !
अभी दुनियादारी वो समझता नहीं है !!

है रवायत यहाँ परिंदो के पर कतरना !
तब भी पहरेदारी वो समझता नहीं है !!

जला देना ख़त उसका शग़ल ही सही !
पर मेरी लाचारी वो समझता नहीं है !!

तोडना हर दिल उसका है खेल ठहरा !
नाज़ुक रिश्तेदारी वो समझता नहीं है !!

क्या कहूँ दिल की बात ज़ुबाँ से अपनी  !
अभी यह ख़ुमारी वो समझता नहीं है !!

समझाऊँ किस किस को नादानियां !
नादान की यारी वो समझता नहीं है !!

लेने दो उनको इश्क के मज़े " तन्हा " !
अभी जिम्मेदारी वो समझता नहीं है !!


- " तन्हा " !!
27-11-2014




हाँ ; मैं ज़िन्दगी के साज़ पर हर रोज़ अब नये तराने लिखता हूँ !
न मिले थे तुम तो थे ज़िंदगी अब मिले तो अफ़साने लिखता हूँ !!

हाँ ; मैं ज़िन्दगी के साज़ पर हर रोज़,,,,,,

जानता था मैं कि तुम ना आओगे हर रोज़ इस गली में मगर !
शाम - ओ - सहर तेरे ना आने के अब लाख बहाने लिखता हूँ !!

हाँ ; मैं ज़िन्दगी के साज़ पर हर रोज़ ,,,,,,

"तन्हा" ही तुम आये थे क्यों "तन्हा" हो कर तुम गए भी क्यों !
उस रोज़ तेरे चले जाने के बाद अब हर रोज़ फ़साने लिखता हूँ !!

हाँ ; मैं ज़िन्दगी के साज़ पर हर रोज़ ,,,,,,

- " तन्हा " !!27-06-2015


han main zindgi ke saj par har roz ab naye tarane likhta hu !
na mile the tum to the zindgi ab mile to afsane likhta hu !!

han main zindgi ke saj par har roz,,,,,,,

janta tha main ki tum na aaoge har roz is gali me magar !
shaam -o- shahar tere na aane ke ab laakh bahane likhta hu !!

han main zindgi ke saj par har roz,,,,,,,,

"tanha" hi tum aaye the kyu tanha ho kar tum gaye bhi kyu !
us roz tere chale jane ke baad ab har roz phasane likhta hu !!

han main zindgi ke saj par har roz,,,,,,,

- " tanha " !!
27-06-2015


Wednesday, 25 February 2015





एतबार करें न करें एहतराम तो करें !
मेरे जनाज़े को इक सलाम तो करें !!

हैं इनायतें इतनी कि उठ न सकूंगा !
कोई उनको मेरा यह पैग़ाम तो करे !!

गुमाँ-ए-इश्क़ में हूँ इस कदर मग़रुर !
पेशानी पे बोसा इक वो ईनाम तो करें !!

गो'या क्या कोई औ बतलायेगा उन्हें !
अपनी नज़रों को नज़रे-आम तो करें !!

तर जाऊं मैं जन्नत और दोज़ख भी !
सब मिल मुझे नज़र-ए-जाम तो करें !!

तन्हा की तंग दिली रास न आई मुझे !
उनके लिखे वो ख़त मेरे नाम तो करें !!

- " तन्हा " !!
 04-04-2014


etbaar kare na kare ehatram to kare !
mere janaje ko ek salam to kare !!

hai inayate itni ki uth na sakunga !
koi unko mera yah paigam to kare !!

guman -e- ishk me hun is kadar magroor !
peshani pe bosa ek wo inam to kare !!

go'ya kya koi or batlatega unhe !
apni nazaron ko nazre-e-aam to kare !!

tar jau mai jannat or dozakh bhi !
sab mil mujhe nazar-e-jaam to kare !!

tanha ki tang dili raas na aai mujhe !
unke likhe wo khat mere naam to kare !!

- " TANHA " !!
 04-04-2014




मेरे ज़नाज़े में न आये तेरे शहर के लोग !
हैं ये किस कदर पराये तेरे शहर के लोग !!

मोहब्बत का मसीहा जिन्हे समझते रहे !
ज़ख्म दे हैं मुस्कराये तेरे शहर के लोग !!

जिक्र-ए-उल्फ़त में है जिक्र तेरा हर बात में !
और मुझे हैं समझायें तेरे शहर के लोग !!

हूँ अपनी वफ़ाओं पर मैं इतराता बहुत !
मुझे ही बेवफ़ा बतायें तेरे शहर के लोग !!

हूँ पाबन्द-ए-वफ़ा तो क्यूँ मैं लब खोलूँ !
हैं तेरा नाम ले सताएं तेरे शहर के लोग !!

है मोहब्बत का दीवाना इक तेरे शहर में !
तन्हा कह के हैं बुलाएँ तेरे शहर के लोग !!

- " तन्हा " !!
01-04-2014

mere janaje me n aaye tere shahar ke log !
hai ye kis kadar paraye tere shahar ke log !!

mohabbat ka masiha jinhe samjhte rahe !
jakhm de hai muskuraye tere shahar ke log !!

jikr -e- ulfat me hai jikr tera har baat me !
or mujhe hain samjhaye tere shahar ke log !!

hun apni wafaou par mai itrata bahut !
mujhe hi be-wafa bataye tere shahar ke log !!

hun paband-e-wafa to kyu mai lab kholu !
hai tera naam le satayen tere shahar ke log !!

hai mohabbat ka deewana ek tere shahar me !
tanha kah ke hai bulaye tere shahar ke log !!

- " TANHA " !!
01-04-2014

Friday, 20 February 2015


इल्तज़ा मोहब्बत की वो ठुकरा के चल दिया !
सबक पहले प्यार का सिखला के चल दिया !!

कौन कहता है कि मोहब्बत ख़ामोश रहती है !
देखो दिल मेरा चीख ओ चिल्ला के चल दिया !!

कितना बे-ग़ैरत हो कर रह जाता है वो इन्सान !
जो दीन ओ ईमान भी याँ झुठला के चल दिया !!

वास्ते जिसके दीदार को तू यहाँ बैठा है "तन्हा"
वो सितमगर भी ख़ुदा को बहला के चल दिया !!

 - " तन्हा " !!
20-02-2015 


iltza mohabbat ki wo thukra ke chal diya !
sabak pahle pyar ka sikhla ke chal diya !!

kun kahta hai ki mohabbat khamosh rahti hai !
dekho dil mera cheekh o chilla ke chal diya !!

kitna be-gairat ho kar rah jata hai wo insaan !
jo deen o imaan bhi yan jhutla ke chal diya !!

waste jiske deedar ko tu yaha baitha hai "tanha" !
wo sitamgar bhi khuda ko bahla ke chal diya !!

- " TANHA " !!
20-02-2015

Wednesday, 18 February 2015


kar ke apni nazar nichi guzar gaii phir se !
dhadkane kitne dilon ki thahar gaii phir se !!

baad-e-saba ne chaman me ye rangat kaisi bikheri !
ki hasrat unhe dekhne ki machal gaii phir se !!

hai mumkin bahut unki tawajjo mei paa jaau !
mujhse kahti hui yah shaam-o-sahar gaii phir se !!

hai tazuub ye ki aaye na wo mere janaje me !
'tanha' ke gujarne ki dekho khabar gaii phir se !!

- " TANHA " !!
12-02-2015


कर के अपनी नज़र नीची गुज़र गई फिर से !
धड़कनें कितने दिलों की ठहर गई फिर से !!

बाद-ए-सबा ने चमन में ये रंगत कैसी बिखेरी !
कि हसरत उन्हें देखने की मचल गई फिर से !!

है मुमकिन बहुत उनकी तवज्जो मैं पा जाऊँ !
मुझसे कहती हुई यह शामों सहर गई फिर से !!

है ताज्जुब ये कि आएं ना वो मेरे जनाज़े में !
'तन्हा' के गुजरने की देखो ख़बर गई फिर से !!

- " तन्हा " !!
 12-02-2015 



मेरी तमन्ना पर ये इंतज़ाम हो जाये !
हर किसी को मयस्सर जाम हो जाये !!

बस "तन्हा" सी है ये ख़्वाहिश बाकी !
किसी राह -गुज़र पे ये शाम हो जाये !!

ऐ खुदा दे मुझे तू जरा सी मोहलत !
क्या पता यह पत्थर इंसान हो जाये !!

- " तन्हा " !!
18-02-2015 

meri tamanna par ye intzam ho jaye !
har kisi ko mayyasar jaam ho jaye !!

bas " tanha " si hai ye khwahish baki !
kisi raah-guzar pe ye shaam ho jaye !!

e khuda de mujhe tu jara si mohlat !
kya pata yah pathhar insaan ho jaye !!

- " TANHA " !!
18-02-2015